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'ममता को हराने के लिए भाजपा से 1 हजार करोड़ की डील!'
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले राज्य की राजनीति में एक ऐसा विस्फोट हुआ है, जिसने सत्ताधारी और विपक्षी दोनों खेमों में खलबली मचा दी है। आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक और पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है हालांकि तृणमूल द्वारा जारी इस वीडियों की पुष्टी छपते-छपते ने नहीं की हैं। इस वीडियो में किए गए दावे न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि अगर ये सच साबित होते हैं, तो बंगाल के पूरे चुनावी गणित को उलट-पुलट करने की क्षमता रखते हैं।
कथित वीडियो में हुमायूं कबीर को यह कहते सुना जा रहा है कि उनका एकमात्र लक्ष्य ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करना है। इसके लिए उन्होंने जो खाका खींचा है, उसमें कथित तौर पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ डील का जिक्र है। वीडियो में दावा किया गया है कि हुमायूं ने शुभेंदु अधिकारी के जरिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचाई है। सबसे विवादित हिस्सा वह है जहाँ हुमायूं कथित तौर पर कह रहे हैं कि मुस्लिम बहुल 70-80 सीटों पर वोट काटने के लिए उन्हें हजार करोड़ रुपये की फंडिंग की जरूरत है, जिसमें प्रति सीट 3-4 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान है। वीडियो में कबीर के हवाले से एक और बड़ा दावा किया गया है कि यदि वह अल्पसंख्यक वोटों में सेंध लगाकर भाजपा की जीत का रास्ता साफ करते हैं, तो उन्हें भविष्य की सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद दिया जाएगा। उनका तर्क है कि मुस्लिम वोटों के बिखराव से हिंदू मतदाता स्वत: ही भाजपा की ओर लामबंद हो जाएंगे। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता की अभी तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन इसने सियासी गलियारों में आरोपों की झड़ी लगा दी है। तृणमूल ने इस वीडियो को लोकतंत्र की हत्या की साजिश करार दिया है।
टीएमसी नेताओं का कहना है कि वे पहले से ही कह रहे थे कि हुमायूं कबीर और ओवैसी की पार्टी जैसे चेहरे भाजपा की बी-टीम के रूप में काम कर रहे हैं ताकि ममता बनर्जी के वोट बैंक को तोड़ा जा सके। दूसरी ओर, हुमायूं कबीर के कैंप ने इसे विरोधियों की साजिश बताया है। हालिया प्रचार में कबीर हेलिकॉप्टर से उड़ान भर रहे हैं, जिसे लेकर पहले से ही फंडिंग के सवाल उठ रहे थे। अब इस वीडियो ने उन चर्चाओं को और हवा दे दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वीडियो ऐन चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश भी हो सकता है। यदि यह वीडियो फर्जी निकला, तो इसे जारी करने वालों पर गाज गिर सकती है, लेकिन यदि इसमें रत्ती भर भी सच्चाई निकली, तो यह बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा स्कैंडल साबित होगा।
फिलहाल, मुर्शिदाबाद से लेकर कोलकाता तक इस कथित वीडियो ने चुनावी चर्चाओं का रुख बदल दिया है। अब जनता की अदालत ही तय करेगी कि यह किसी नेता की हुंकार थी या फिर कोई चुनावी षड्यंत्र।